336राय
5m 25sलंबाई
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देश में किसानों की अपनी समस्याएं हैं... अक्सर सिंचाई के लिये उन्हे पानी की जरूरत पड़ती है... पानी निकालने के लिये उन्हे पम्प की जरूरत पड़ती है और पम्प चलाने के लिये डीजल या बिजली की... लेकिन कोई शख्स अगर किसानों की इस समस्या को कम कर दे और बिना बिजली या डीजल के ही पम्प चलाकर पानी ऊंचाई तक या खेतों तक पहुंचाने का कोई विकल्प दे दे... तो आप क्या कहेंगे... जाहिर है शाबाशी देंगे... और उसके गुणगान करते नजर आएंगे... क्योंकि खेतों तक पानी पहुंचाने के लिये किसानों को अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है और उन इलाकों के किसानों को तो और भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनके खेत ऊंचाई पर होते हैं... चलिए आज एक्सपोज इंडिया आपकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से कराने जा रहा है जिसका योगदान तो बहुत बड़ा है लेकिन राजनीति के चलते उसका प्रयास इतिहास के पन्नों पर में दर्ज नहीं हो पाया... ये है मंगल सिंह... आधी जिंदगी को पार चुके मंगल सिंह को मलाल है कि उसकी ईजाद की गई प्रणाली को चंद लोगों की घटिया नीतियों के चलते इतिहास के पन्नों में दर्ज होने का सुनहरा मौका नहीं मिल सका। मंगल सिंह का कहना है कि भारत सरकार के साथ ही मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने भी मंगल टर्बाइन की सराहना की। सरकारों के भेजे गए अधिकारियों भी इसकी तारीफ की। वहीं दिल्ली आईआईटी और विज्ञान शिक्षा केन्द ने बुंदेलखण्ड के जल संसाधनों का सर्वे किया और मंगल टर्बाइन का आंकलन किया। सर्वे करने के बाद पता चला कि मंगल टर्बाइन किसानों के लिये काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ये एक दिन में ग्यारह घंटे चलती है जिससे चौवालिस लीटर डीजल की बचत होती है... वहीं इसकी खासियत ये भी है कि ये तीन सौ पैंतीस ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन भी करती है। यही नहीं मध्य प्रदेश की दसवीं कक्षा की विज्ञान की पुस्तक में मंगल टर्बाइन का जिक्र है।