836राय
2m 57sलंबाई
3रेटिंग

कैसे करें रोहिड़ा की उन्नत खेती शुष्क और आर्द्र-शुष्क इलाकों में कृषि वानिकी के लिए रोहिडा एक महत्वपूर्ण वृक्ष है जो ईधन और चारे के साथ-साथ उच्चकोटि की लकड़ी का उत्पादन करता है यह 4 से 8 मीटर लम्बाई और 50 से 80 सेटीमीटर गोलाई का होता है और गहरी जड़ों का काफी धीरे बढ़ने वाला वृक्ष है | पौधशाला के रख-रखाव की विधि:- रोहिड़ा बीज द्वारा आसानी से अंकुरित होता है और इसको पूर्व उपचार की आवश्यकता नहीं होती,यधपि बीज को 4 घंटे के लिए ठन्डे पानी में डुबो देने से यह एक समान अंकुरित होने के लिए प्रभावशाली बन जाता है | बीज संग्रह:- रोहिड़ा एक सदाबहार लम्बी झाड़ी या छोटे वृक्ष के आकार का वृक्ष होता है जिसकी शखाएं झुकी हुई और तना मुड़ा हुआ होता है | इसमें नवम्बर के प्रथम सप्ताह से पतझड़ आरम्भ हो जाता है और मार्च के अंत तक बना रहता है | इसमें फरवरी और उसके बाद से नै पतियाँ आणि आरम्भ हो जाती है यह वृक्ष स्वंय भी और दूसरों के द्वारा भी परागित होता है इसके फूलने का समय दिसम्बर से अप्रैल के मध्य तक का है | मई और जून के दौरान इसके फल तैयार होते है | पौधों की अंकुरण क्षमता फसल के तुरंत बाद होती है और 1 वर्ष बाद पूरी तरह समाप्त हो जाती है | वृक्षारोपण की विधि:- जब पौधा 9 से 12 महीने का हो तब उसे भुर-भूरी मिटटी में गहरा गाड़ दे जिससे कि वह अधिक देर तक जीवित रह सके और बढ़ सके | उपयोगिता:- लकड़ी के लिए यह एक महत्वपूर्ण और गुणकारी वृक्ष है इसकी लकड़ी काफी सख्त,रवादार सलेटी से पीले रंग की होती है इसकी लकड़ी खिलौने बनाने,मूर्ति बनाने के कम आती है | इसके लट्टे और शाखाएं ईधन के रूप में प्रयोग किए जाते है |